Saturday, 16 September 2017

प्रदुम्न की मौत

कुछ दिन पहले हुए इस हादसे ने मुझे कुछ सोचने को मजबूर किया और मेरे अंदर इसके बारे में लिखने की असीम जिज्ञासा पैदा हुई। पता नही मैं अपनी संवेदनाओ को शब्दों में समेट पाऊंगा कि नहीं पर इतना यकीन है कि मेरे आँखों की नमी स्याही बन कर कागज पर उतरेगी ज़रुर ।

ये प्रदुम्न की मौत नहीं है। ये इंसानियत की मौत है, उस इंसानियत की, जिसकी कल्पना कर किसी रचयिता ने इस मानव सृष्टि को बनाया होगा ।

उस क्षण को सोच कांप उठता हूँ मैं, जब किसी ने प्रदुम्न को ज़ोर लगाकर अपनी तरफ खींचा होगा और प्रदुम्न अपनी आंखे भींच चिल्लाया होगा। जब उस शख्स ने प्रदुम्न की गर्दन पकड़ी होगी तो क्या एक बार भी उसको प्रदुम्न के मासूम चेहरे पर तरस आया होगा या फिर जब, उसने उसकी गर्दन पर छुरी रखी होगी तो क्यों नहीं उसको प्रदुम्न की आंखों का दर्द दिखा होगा। शायद उस ही पल मानवता ने कफ़न लपेटा होगा।

इसीलिए एक बार फिर मैं कहता हूँ ये सिर्फ प्रदुम्न की मौत नहीं है, ये हमारे अंदर की भावनाओं की मौत है।

सिसक रहीं हैं मेरी आँखें
आसुंओ से भर गया है दिल
एक बार फिर
इंसान ढूंढ़ने निकला हूँ मैं 

अतुल जैन



Friday, 23 June 2017

गुड़िया

दस्तूरों की दुहाई देखी है
रिश्तों की रुस्वाई देखी है
उमंगी इस आकाश में
गुड़िया अकुलाई देखी है

आसमानी उड़ान देखी है
लंबी सी छलांग देखी है
दौड़ती इस दुनिया में
गुड़िया की ढलान देखी है

भेड़ियों का सरदार देखा है
यौवन का बाजार देखा है
भक्षी इस जंगल में
गुड़िया का शिकार देखा है

झूमता ज़माना देखा है
सफर ए सुहाना देखा है
सुनहरी इस बेला में
गुड़िया का मुरझाना देखा है

साभार
अतुल जैन

Thursday, 18 May 2017

खुद पे विश्वास

अतीत की रोशनी
वर्तमान का अंधकार
और भविष्य का उजाला
सिर्फ समय ही इनको जोड़ता है
इसलिए इस पे भरोसा रखो

खुद पे विश्वास और अंतहीन आस
बड़े से बड़ी चट्टान को तोड़ने का माद्दा रखती है
और जहाँ हो अटूट हिम्मत और बेरोक मेहनत
सफलता की सेज वहीं सजती है

साभार अतुल जैन

Wednesday, 17 May 2017

गुड़िया

दस्तूरों की दुहाई देखी है
रिश्तों की रुस्वाई देखी है
उमंगी इस आकाश में
गुड़िया अकुलाई देखी है

आसमानी उड़ान देखी है
लंबी सी छलांग देखी है
दौड़ती इस दुनिया में
गुड़िया की ढलान देखी है

भेड़ियों का सरदार देखा है
यौवन का बाजार देखा है
भक्षी इस जंगल में
गुड़िया का शिकार देखा है

झूमता ज़माना देखा है
सफर ए सुहाना देखा है
सुनहरी इस बेला में
गुड़िया का मुरझाना देखा है