एक रोज़ बैठेंगे मिल के
जाम पियेंगे दिल के
महफ़िल सजेगी यादों की
आसमानी इरादों की
वादों की लगायेंगे झड़ी
ठहाकों की भी होगी लड़ी
गायेंगे बिसरे गीत
छेड़ेंगे पुरानी प्रीत
मस्त होगा ये दौर
इंतज़ार न करो और
एक रोज़ बैठेंगे मिल के
जाम पियेंगे दिल के
अतुल जैन
जाम पियेंगे दिल के
महफ़िल सजेगी यादों की
आसमानी इरादों की
वादों की लगायेंगे झड़ी
ठहाकों की भी होगी लड़ी
गायेंगे बिसरे गीत
छेड़ेंगे पुरानी प्रीत
मस्त होगा ये दौर
इंतज़ार न करो और
एक रोज़ बैठेंगे मिल के
जाम पियेंगे दिल के
अतुल जैन
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