मत छेड़ो इस पीड़ा
को
समय की इस क्रीड़ा
को
तम और घनघोर हुआ
कौतूहल सा शोर
हुआ
घटा और बेचैन हुई
बहुत लम्बी रैन
हुई
अश्रुओं की धारा
बही
चित में ना आस
रही
पंछियों ने छोड़ा
बसेरा
आहतों ने सहसा
घेरा
मत छेड़ो इस पीड़ा
को
समय की इस क्रीड़ा
को
अतुल जैन
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