Sunday, 14 December 2014

ये दुनिया



ये दुनिया बहुत कमीनी है
इसने भूखे की रोटी छीनी है

मर कर भी आदमी जीता है
हर औरत यहाँ पर सीता है

किसी को किसी की खबर नहीं
किसी को यहाँ पर सबर नहीं

इमान यहाँ झुकता है
अरमान यहाँ लुटता है

मौत यहाँ बिकती है
सांस यहाँ रिसती है

कोख के लगती कीमत है
बेशर्मी बनती जीनत है

खून यहाँ पानी है
प्यार यहाँ बेमानी है

रावन का यहाँ राज है
सच की मरती आवाज है

मुश्किल यहाँ जीना है
छलनी यहाँ सीना है

अतुल जैन

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