ज़िन्दगी में यूं मशगूल हैं
कि खुद से बहुत दूर हैं
कि खुद से बहुत दूर हैं
खो गए खुद हम कुछ यूं
रिश्तों में
कि बाँट दिया खुद को कुछ
हिस्सों में
ये खुद से खुद का धोखा है
कि हर मोड़ पे खुद को रोका
है
ये खुद की खुद से पुकार है
कि खुद से मिलना एक बार है
अतुल जैन
No comments:
Post a Comment