भोर में वो चमक
नहीं है
चेहरे पे वो दमक
नहीं है
रोटी में वो नमक
नहीं है
जूनून में वो सनक
नहीं है
उल्फत में वो
सैलाब नहीं है
इज्ज़त में वो
आदाब नहीं है
शर्म में वो नकाब
नहीं है
जंग में वो रक़ाब
नहीं है
पेड़ में वो छांव
नहीं है
घुंघरू में वो
पांव नहीं है
खेल में वो दांव
नहीं है
लहरों में वो नाव
नहीं है
शाम में वो मंज़र
नहीं है
भक्ति में वो
खंजर नहीं है
सीने में वो पंजर
नहीं है
जंगल में वो संजर
नहीं है
प्रेमी में वो
प्रीत नहीं है
रिश्तों में वो
रीत नहीं है
सुर में वो संगीत
नहीं है
स्वर में वो गीत
नहीं है
जस्बातों में वो
एहसास नहीं है
वचनों में वो
वनवास नहीं है
सपनों में वो आस
नहीं है
दस्तक में वो
आभास नहीं है
ममता में वो भाव
नहीं है
सोच में वो फैलाव
नहीं है
चरित्र में वो
ठहराव नहीं है
बातों में वो चाव
नहीं है
ढाढस में वो पीर
नहीं है
आँखों में वो नीर
नहीं है
परसी में वो खीर
नहीं है
बोली में वो धीर
नहीं है
अतुल जैन
अतुल जैन
No comments:
Post a Comment