रेत के महलों में
पत्थर गुमनाम है
झूठ के बाज़ार में
हकीकत नीलाम है
इमान के रेगिस्तान में
फ़रेब सरेआम है
मक्कारी के कोठे पे
शराफ़त बद्नाम है
तरक्की के खटोले पे
उड़ानों की कमान है
छोड़ा पीछे तुमने
महकता गुलफाम है
जस्बातों का क़त्ल कर
चेहरे पे मुस्कान है
दिखावे के इस मेले में
तू यूँ ही परेशान है
ज़िंदगी के दौड़ में
ये अजब फरमान है
दिल का दिमाग से
ये कैसा संग्राम है
आपका
अतुल जैन
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