ये दुनिया बहुत कमीनी है
इसने भूखे की रोटी छीनी है
मर कर भी आदमी जीता है
हर औरत यहाँ पर सीता है
किसी को किसी की खबर नहीं
किसी को यहाँ पर सबर नहीं
इमान यहाँ झुकता है
अरमान यहाँ लुटता है
मौत यहाँ बिकती है
सांस यहाँ रिसती है
कोख के लगती कीमत है
बेशर्मी बनती जीनत है
खून यहाँ पानी है
प्यार यहाँ बेमानी है
रावन का यहाँ राज है
सच की मरती आवाज है
मुश्किल यहाँ जीना है
छलनी यहाँ सीना है
अतुल जैन