मैंने उस दिन से दीवाली मनाना छोड़ दिया
जब मैंने दीवाली की उस काली और सर्द रात
ढाई बजे उस छोटे से बच्चे को
जले और बुझे पटाखों में से
मसाला इक्कठा करते देखा
जिससे वो
अपने बचपन में
वो रोशनी भर सके
जो उसका पिता गरीबी की वज़ह से
उसको ना दे पाया.
सादर नमन
अतुल जैन
जब मैंने दीवाली की उस काली और सर्द रात
ढाई बजे उस छोटे से बच्चे को
जले और बुझे पटाखों में से
मसाला इक्कठा करते देखा
जिससे वो
अपने बचपन में
वो रोशनी भर सके
जो उसका पिता गरीबी की वज़ह से
उसको ना दे पाया.
सादर नमन
अतुल जैन
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