Tuesday, 29 December 2015

दीवाली

मैंने उस दिन से दीवाली मनाना छोड़ दिया
जब मैंने दीवाली की उस काली और सर्द  रात
ढाई बजे उस छोटे से बच्चे को
जले और बुझे पटाखों में से
मसाला इक्कठा करते देखा
जिससे वो
अपने बचपन में
वो रोशनी भर सके
जो उसका पिता गरीबी की वज़ह से
उसको ना दे पाया.

सादर नमन
अतुल जैन 

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