Friday, 26 August 2016

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो

राधा के इंतज़ार में
गोपियों के प्यार में

वासुदेव की डलिया में
बृज की बगिया में

बाँसुरी की लीला में
गोपालों की क्रीड़ा में

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो

यशोदा के आँचल में
सुदामा के चावल में

यमुना के छोर में
छुपते माखन चोर में

नन्द के लाड़ में
गोवर्धन पहाड़ में

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो

बरसाने की होली में
पनघट की ठिठोली में

सावन के गीत में
नटखट से मीत में
 
मोर के पंख में
पांचजन्य शंख में

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो

मीरा की भक्ति में
अर्जुन की शक्ति में

कौरवों के वार में
गीता के सार में

सुदर्शन की धार में
विष्णु के अवतार में

भगवन... तुम ही तुम दिखते हो







Wednesday, 29 June 2016

अमन और दोस्ती

अब तो अश्क भी जवाब माँगते हैं
उनके लिये क्यों रोंये; जो हिसाब माँगते हैं
जिंदगी भर जो रहे खुद में मशगूल
वो हमसे वफा की किताब माँगते हैं

जो रहे ताउम्र हमारे; इन्कलाब माँगते हैं
अपने लिये नया आफ़ताब माँगते हैं
घाटी इस कदर खौफज़दा है दोस्तों
कि जुगनू भी अब नकाब माँगते हैं

नफ़रत के दौर में अमन सैलाब माँगते हैं
जन्नती दुनिया का ख्वाब माँगते हैं
दीवाली की रौशनी में चलो इस बार
हम ईदी और अदब ए आदाब माँगते हैं

दौड़ती जिंदगी में सुकून बेताब माँगते हैं
फ़ीके रिश्तों में रंग सुर्खाब माँगते हैं
चलो उस रूठे शख्स से आज हम
दोस्ती का एक बार गुलाब माँगते हैं

आभार सहित
अतुल जैन

Wednesday, 6 April 2016

ए जिंदगी

हसरतों को पूरा कर ले ए जिंदगी
मौत की शाम का इंतज़ार ना कर
बहुत ग़म हैं ज़माने में यूं ही
ख्वाइशों को दफन सरेआम ना कर

अतुल जैन

Friday, 25 March 2016

होली

मस्ती का गुलाल है 
धूम की पिचकारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

मिलन का त्यौहार है 
ईर्ष्या जिससे हारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

हँसी का गुब्बारा है 
नाचे दुनिया सारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

नन्द की शरारत है 
गोपियों की गारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

गुजिया की ख़ुशबू है 
ठंडाई की खुमारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

इसको रंगा उसको रंगा 
अब तुम्हारी बारी है 
बच के रहना दोस्तों 
देखो होली आ री है...

अतुल जैन