Wednesday, 6 June 2018

सिमटता बचपन

उनको बचपन की सौगात दे दो
नन्हे हाथों में अपना हाथ दे दो
दौड़ लो कुछ दूर उनके साथ नंगे पैर
फिर मुड़कर प्यार से आवाज़ दे दो

खिलखिलायेंगे वो मिट्टी के घरौंदे बना के
रूठ जाएंगे हाथों को चेहरे पे लगा के
बालों को सहला के जस्बात दे दो
चंदा मामा वाली उनको एक रात दे दो

अपनी व्यस्तता को कुछ आराम दे दो
बैठो उनके साथ और एक पहचान दे दो
बहुत ख्वाईशें हैं छोटे से दिल में उनके
पंख लगाकर एक ऊंची उड़ान दे दो

साभार
अतुल जैन

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