अपने विचारो के पंख लगाकर
सपनो के आसमान मे उड़ना
एक अच्छा अनुभव है
परन्तु अपने कर्मो की स्याही से
लिखनी हैं भविष्य के खुले आसमान में
एक नयी कविता
जिसका सृजन तो अब होगा
परन्तु उसका अर्थ एवम समझ
अभी भविष्य के पर्दों के पीछे है
परदे एक एक करके हटेंगे
और नयी कहानियों से सामना होगा
लेकिन अभी कविता लिख देने से
वो कहानिया इसी कविता का अंश होंगी
अतः कविता अभी ही लिखनी है
सपनो की नहीं
कर्मो की स्याही से.
अतुल जैन
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