Kalrav
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Friday, 13 June 2014
बड़े शहर की जिंदगी
थक कर चूर हूँ
फिर भी मजबूर हूँ
उठकर तैयार हूँ
एक नई तलवार हूँ
दौड़ का हिस्सा हूँ
मंजिलो का किस्सा हूँ
किस्तों का जाल हूँ
खुद मे ही सवाल हूँ.
अतुल
जैन
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