मुझे खुशी है
कि मिला है
समय आपको,
शायद इसीलिए कह सकूँगा
खुलकर मैं अपनी
बात को,
मेरी रचनाएँ मेरे विचारों
का प्रतिबिम्ब हैं,
जो मेरे दिल
एवम् मन की भावनाओ, शंकाओ, दशाओ और अवस्थाओं को आपके
समक्ष प्रस्तुत करेंगी.
ये रचनाएँ मेरे हृदय
से लिखी गयीं
हैं, आशा हैं
ये आपके हृदय
को छू लेंगी.
वो रचना एवम्
रचनाएँ जो आपके
दिल तक जाएँगी,
शायद वही होंगी
मेरी सफल कृति.
शुभ
समय,
अतुल जैन
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ReplyDeleteलोग िजसे कहते हैं िलखना
ReplyDeleteदरअसल वो कागज़ के आइने में होता है खुद का िदखना
शुभकामनाएं नीलेश जैन मुंबई
बहुत खूब... कभी खुद के अन्दर झांकना अत्यंत आनंद देता हैं. धन्यवाद् प्रोत्साहन के लिए...
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